Zara Socho To Sahi

Zara Socho To Sahi.

ज़रा सोचो तो सही

ज़रा ये तो मुझे समझो, की जब कोई मूवी या हीरो की पोस्ट हम देखते है तो उस पेज पर शामिल जाएदा से जाएदा लोग उससे लिखे करते है, पर जब एक इस्लामिक पेज पर कोई पोस्ट होती है तो उस इस्लामिक पेज की पोस्ट पर ७% से भी काम लिखे होते है, ये मुझे समझ नहीं आता.

ज़रा-सोचो-तो-सही

ज़रा ये तो मुझे समझो, जब कोई हियर अपने पेज पर कोई फोटो ये कमेंट पोस्ट करता है तो हमारी उंगलिया कमेंट करने से रुके नहीं रूकती पर जब इस्लामिक फेसबुक पेज पर कोई इस्लामिक फोटो पोस्ट की जाये तो कमेंट करने का मन नहीं करता, ये मुझे समझ नहीं आता.

ज़रा सोचो तो सही

ज़रा ये तो मुझे समझाओ, जब अज़ान होती है और बाँदा अपने घर में टीवी देख रहा होता है तो उसका साउंड बंद करने की भी ज़हमत नहीं करता, पर जब कही सॉन्ग (गाना) की आवाज़ अति है तो वही बंद टीवी का साउंड जब तक ऑफ रखता है जब तक सॉन्ग (गाना) की आवाज़ बंद न हो जाये, ये मुझे समझ नहीं आता.

फिर सोचता हो मैं

फिर सोचता हो मैं य अयेसो आराम की दुनियावी ज़िन्दगी। एक मोमिन को अपनी असल आख़िरत की ज़िन्दगी से कितना दूर करते जा रही है, ज़रा सोचो तो हमारी कितनी ज़िंदगी बाकि है फिर क्यों न हम शैतान से कुछ दूरी बना कर रहे, ६०-७० साल इस ज़िन्दगी में इंसान सरे बुरे काम करने से बाज़ नहीं आता शायद इंसान भूल गया है ये दुनिया तो एक ख्वाब है, क्या पता कब आखे खुल जाये आपकी और आप अपने असल दुनिया में पहुंच जाओ, ये सलमान खान, शारुख खान, टीवी की दुनिया हमारे काम नहीं आने वाली। ज़रा सोचो तो सही! ज़रा सोचो तो सही!!

 


Fatal error: Uncaught Exception: 12: REST API is deprecated for versions v2.1 and higher (12) thrown in /home/irfansid/digitalhadith.com/wp-content/plugins/seo-facebook-comments/facebook/base_facebook.php on line 1273