Umme Momenin Hazrat Bibi Ayesha Siddiq

Umme Momenin Hazrat Bibi Ayesha Siddiq

आप अमीरुलमोमेनीन हज़रत अबु बक्र सिद्दीक़ रदियल्लाह अन्हो की बेटी है. आपकी माँ का नाम उम्मे रूमान था. आप मक्का शरीफ में पैदा हुई थी. हिज़रत के वक़्त आप बहुत छोटी थी. मक्का के हंग्गामी हालात और कुफ़्फ़ारे कुरैश की जयदति व जुल्म आप के पेशे नज़र थे. उन्ही हग्गामी माहोल में आपके वालिद ने आपका निकाह अल्लाह के प्यारे रसूल सल्लल्लाहो अलैय व सल्लम से कर दिया था. लेकिन विदाई मदीना आने के बाद शौवाल सन 2 हिजरी में हुई. अज़्वाजे मुतहहरात में आप सब से काम उम्र की थी लेकिन इल्म वा तक्वा में आपका मर्तबा बहुत बुलंद था. अल्लाह के रसूल आपसे बड़ी मोहब्बत फरमाते और फ़रमाया करते – किसी और बीबी के बिस्तर पर होने की हालत में मेरे पास जिब्राईल अल्लाह का पैगाम लेकर तशरीफ़ नहीं लाए लेकिन यह मर्तबा आयेशा को हासिल है.

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आप नमाज़ व रियाज़त की बड़ी पाबन्द थी. इल्म का यहाँ हाल था की बड़े – बड़े सहाबा आपसे मसाइल मालूम फ़रमाया करते। सदक़ा खैरात के के मामले में भी आप सब से आगे थी. आपको दुनिया की दौलत व शोहरत की पर्वाह नहीं थी बल्कि आपके पास जो भी आता ज़रूरतमन्दो में तश्किम फरमा दिया करती। आपकी खादिम का बयान है – एक बार की बात है – आप के पास तक़रीबन एक लाख दिरहम किसी ने नज़राना के तौर पर भेजवाए। आपने एक ही दिन में वह सारी रकम गरीबो में तकसीम फरमा दी. हम दोनों उस दिन रोज़े में थे. शाम को इफ्तार का इंतेज़ाम नहीं था. मैंने अर्ज़ किया – अगर आप एक दिरहम ही रख लेती तो अभी इफ्तार के लिए कुछ इंतिज़ाम हो जाता। आपने जवाब दिया – अगर पहले बताया होता तो रख लेती।

आपके फज़ाएल में बहुत सी हदीसे आई है. यो तो उम्र में आप छोटी थी लेकिन इल्म, तक़वा, सखावत और शुजाअत में और बीबियों से आगे थी. आपने तक़रीबन 10 साल अल्लाह के प्यारे रसूल के साथ बिताये। आपकी ही गोद में अल्लाह के प्यारे रसूल ने अपनी दुनियावी ज़िन्दगी की आखिरी सांसे ली और आपका ही हुज़रा आपका आखिरी आराम गाह बना जहा रोज़ाना 70 हज़ार फ़रिश्ते सुबह को और 70 हज़ार फ़रिश्ते शाम को हाज़िर हो कर सलाम पेश करते है. और खुशनसीब उम्मती भी वहां पहुंच कर अपना गुलमाना सलाम पेश करते है.

17 रमजान सन 57 या 58 हिज़री मंगल की रात आपने मदीना शरीफ में पर्दा फ़रमाया। मशहूर सहाबी, खादिमें रसूल हज़रत अबु हुरैरा रदियल्लाहो अन्हो ने आप की नमाज़े ज़नाज़ा पढ़ाई और मदीना के मशहूर कब्रिस्तान जन्नतुल बाकि में दूसरी अज़वाज़े मुतहहरात के पास आपको दफ्न किया गया. अल्लाह की रहमते हो उन पर और बकी में मदफ़ून सारे मोमेनीन पर भी. अमीन


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