Mohammed Sallallaho Alayhi Wasallam Ne Farmaya

Mohammed Sallallaho Alayhi Wasallam Ne Farmaya.

इब्न अब्बास रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सललल्लाहू अलैही वसल्लम ने ज़कात-उल-फित्र को बेकार और बेहूदा बात से रोज़ को पाक करने और मिस्कीनो की परवरिश के लिए मुक़रार फ़रमाया है जो शख्स ईद की नमाज़ से पहले इसे अदा करेगा वो ज़कात की तरह क़ुबूल किया जाएगा और और अगर कोई नमाज़ के बाद अदा करेगा तो वो दूसरे सदक़े की तरह एक सदक़ा होगा.

अबू दाऊद, जिल्द 1 , 1596 – हसन

हदीस : अब्दुल्लाह बिन उमर रदी अल्लाहू अन्हुमा से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सललल्लाहू अलैही वसल्लम ने ज़कात-उल-फ़ित्र एक सा खजूर याएक सा जौ ( एक सा = 3 किलोग्राम ) फ़र्ज़ क़रार दी है जो गुलाम , आज़ाद, मर्द , औरत छोटे और बड़े तमाम मुसलमानो पर फ़र्ज़ है और आप सललल्लाहू अलैही वसल्लम ने ये हुक्म दिया है की नमाज़ (ईद) के लिए जाने से पहले ये सदक़ा अदा कर दिया जाए.

सही बुखारी , जिल्द 2, 1503

Abullah Bin Umar Radi Allahu Anhuma Se Riwayat hai.

अब्दुल्लाह बिन उमर रदी अल्लाहू अन्हुमा से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सललल्लाहू अलैही वसल्लम रमज़ान के आखरी अशरे में एतकाफ करते थे.

सही बुखारी, जिल्द 3, 2025

अबू ज़र रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की हमने रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम के साथ रमज़ान के रोज़े रखे उनहोने हमको 23 रात तक क़याम अल लैल की नमाज़ नही पढ़ाई , फिर 23 रात को एक तिहाई रात तक नमाज़ पढ़ते रहे, फिर 24 रात को नमाज़ नही पढ़ाई और फिर 25 रात को आधी रात तक नमाज़ पढ़ते रहे मैने अर्ज़ किया की या रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम काश आप बाक़ी रात का वक़्त भी हमारे साथ इसी तरह नमाज़ अदा फरमाते. आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने इरशाद फरमाया जो शख्स ईमाम के साथ(क़याम में ) खड़ा हो और उसके फारिग होने तक साथ रहे उसको पूरी रात क़याम अल लैल (सारी रात नमाज़ पढ़ने) का सवाब मिलता है और उसके बाद रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने 27 रात को अपने अहल ओ अयाल और अज़वाज़ ए मुताहहरात (घरवालों) को भी जमा करके नमाज़ अदा फरमाये, यहा तक की हमको फ़लाह के निकल जाने का ख़तरा मालूम हुआ, पूछा की फ़लाह क्या है तो फरमाया सेहरी.

सुनन नसाई, जिल्द 1, 1608-सही. किताब क़याम अल लेल (रात का क़याम / तहज्जुद)

mohammed-salla-alayhi-wasallam-ne-farmaya

उम्म आएशा रदी अल्लाहू अन्हा से रिवायत है की जब रमज़ान का आखरी अशरा आता तो नबी सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम अपना तहबंध
मजबूत बाँध लेते (यानि इबादत के लिए कमर कस लेते) और उन रातों में आप खुद भी जागते और अपने घरवालों को भी जगाते.

सही बुखारी , जिल्द 3, हदीस 2024

Mohmmeed Bin Qaba Radi Allahu Anhu Abullah Bin Masud Radi Allahu Anhu Se Riwayat Hai.

मुहम्मद बिन काब रदी अल्लाहू अन्हु अब्दुल्लाह बिन मसूद रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत करते है की रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जिसने क़ुरान माजिद में से एक हरफ़ पढ़ा तो उसको इसके बदले एक नेकी दी जाएगी और हर नेकी का सवाब दस गुना है मैं ये नही कहता की अलिफ-लाम-मीम (एक) हरफ़ है बल्की अलिफ एक हरफ़ है, लाम एक हरफ़ है, और मीम भी एक हरफ़ है ( यानी कोई मुसलमान अलिफ-लाम-मीम पढ़ता है तो उसको 3 नेकी मिलती हैं जिसका सवाब 30 नेकियो के बराबर होता है).

जामिया तिरमिज़ी , जिल्द 2, 819-हसन

उसमान रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया तुम में से बेहतरीन वो है जो क़ुरान मजीद पढ़े ( सीखे) और पढ़ाए ( सिखाए).

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सही बुखारी, जिल्द 6 , 5028

अमर बिन अल-‘आस रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की एक औरत रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम के पास आई उसकी बेटी भी उसके साथ थी और उसकी बेटी के हाथ में सोने के दो बड़े बड़े कंगन थे आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने पूछा क्या आप इन कंगनो की ज़कात देते हो ? उसने कहा नही , आप सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया क्या आपको ये पसंद है की क़यामत के दिन अल्लाह आपको आग के कंगन पहनाए ये सुनकर उसने उसी वक़्त कंगन उतार दिए और आपकी खिदमत में पेश करते हुए कहा की ये अल्लाह और उसके रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम के लिए है.

सुनन अबू दाऊद, जिल्द 1, 1550-हसन


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