Akharat Ka Ghar Jannat

Akharat Ka Ghar Jannat

अल्लाह पाक ने मोमिन बन्दों पर तरह तरह की इबादतें फ़र्ज़ फ़रमाई है और उसके बदले उन्हें आख़िरत में जन्नत अता फरमाने की खुशखबरी सुनाई है जहा उनकी हर खुवाहिस पूरी की जाएगी। लेकिन यह भी ताकीद की गयी की जन्नत पाने की तमन्ना में इबादत नहीं करनी चाहिए बल्कि रब के फरमान पर सच्चे दिल से अमल के इरादे से करनी चाहिए।

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यह भी जरुरी नहीं की इबादत के बदले जन्नत मिल ही जाये बल्कि यह तो बन्दे की नियत और अल्लाह की रहमत पर मुनहसिर (डिपेंड) है। लेकिन यह भी यकीन रखना चाहिए की अल्लाह पाक किसी की मेहनत को बेकार नहीं जाने देता। वह हमारे नेक कर्मो का फल जरूर देगा। हमें नेक नियति के साथ उसके अहकाम और उसके प्यारे रसूल के फरमान पर अमल करते रहना चाहिए।

अल्लाह ने फरमाया – जन्नत में तुम्हरी हर खवाहिश पारी की जाएगी

यह भी मालूम होना चाहिए की आख़िरत में नेक अमल के बदले जन्नत मिलेगी लेकिन सब को एक ही तरह की जन्नत नहीं मिलेगी बल्कि अल्लाह के करम से बन्दे को उसके अमाल के हिसाब से जन्नत मिलेगी। जन्नत कितनी खूबसूरत है, उसमे मिलने वाली नेमते कैसी है, हदीस शरीफ में आया है की वह इतनी खूबसूरत है की आज तक किसी के दिलो दिमाग में उसका ख्याल ही नहीं आया होगा, न ही किसी की जबानी सुना होगा। अल्लाह ने फरमाया – जन्नत में तुम्हरी हर खवाहिश पारी की जाएगी, तुम जो दुआए माँगा करते थे, वह सब तुम्हे पूरी मिलेगी। यह सब अल्लाह के तरफ से मेहमानी के तौर पर इनाम में मिलेगा।

जन्नतियो की खिदमत के लिए हूरे मिलेगी। वह इतनी खूबसूरत होगी की अगर दुनिया की तरफ एक नज़र देख ले तो उनकी रौशनी के आगे चाँद, सूरज और सितारों की रौशनी मंद पड़ जाये, पूरी दुनिया खुशबु से भर जाये उनके ज़ेवर की चमक भी चाँद सूरज से जाएदा रौशन है।

अमल के हिसाब से लोगो को अलग अलग तरह की जन्नत मिलेगी।

अमल के हिसाब से लोगो को अलग अलग तरह की जन्नत मिलेगी। उसमे में बहुत सरे दर्ज़े है जिस तरह रेल तो एक ही होती है लेकिन उसमे कई तरह के डब्बे होते है। हर जन्नत इतनी बड़ी है की अगर सारी दुनिया के लोग उसमे जमा हो जाये तो भी न भरे। जन्नत में एक आएसा पेड़ है, उसकी छाए इतनी दूर तक फैली हुई है की अगर को आदमी तर रफ़्तार घोड़े पर सवार हो कर सौ बरस तक उसके निचे चले तो भी उससे पार न कर सके।

जन्नत का एक दरवाज़ा इतना चौडा है की उसके एक किनारे से दूसरे किनारे तक घोड़े पर सवार हो कर ७० साल में न पहुंच सके, फिर भी जब जन्नती उसमे दाखिल होने लगेंगे तो तंग पड़ जायेगा। जानन्त की दीवारे होने चंडी की ईटो से बानी है और कंकड़ो की जगह जमकदार याकूत लगे है जन्नतियो के चेहरे १४ रात के तरह रौशन होगे। उनमे कोई भेद – भाव नहीं होगा। जन्नती जब अपने ठिकानो पर पहुचेगे तो दो हूरे खुद की तस्बी बयां करती हुई उनका इस्तेकबाल करेगी। उनकी आवाज़ इतनी सुरीली होगी की जन्नती अपनी दुनियावी ज़िन्दगी, कब्र व हर्ष की सारी तकलीफे भूल जाएगे।

जन्नतियों के बदन पर शिर्फ़ सर, पलकों और भवो पर बाल होगे और कही बाल नहीं होगे। आखे शर्मीली होगी। जन्नती को जब अल्लाह उनके गुनाहो की याद दिलाएगा तो वो वह ख्व्फ्ज़दा होकर पूछेंगे – मेरे मौला! क्या तूने हमें बक्शा नहीं? जवाब मिलेंगे – हमारी बक्शीश से ही तुम जन्नत के हक़दार बने हो।

अल्लाह पाक हमें सब को नेक अमल की तौफीक बख्शे और अपने फ़ज़ल से जन्नत की बहारो का हक़दार बनाये ! अमीन !!

शिराते मुस्तकीम – उदयपुर


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